चीन में आमिर खान का जलवा

पिछले साल कजाखिस्तान में एक शिखर सम्मेलन के मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अनौपचारिक बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा था कि उन्हें ‘दंगल’ बहुत पसंद आयी और वे आगे भी ऐसी भारतीय फिल्में देखना चाहेंगे. आमिर खान अभिनीत और नीतेश तिवारी निर्देशित ‘दंगल’ ने चीन में 12 सौ करोड़ रुपये कमाये थे. आम दर्शकों से लेकर चीनी फिल्म समीक्षकों ने फिल्म के प्रगतिशील कथानक को खूब सराहा था. हालिया प्रदर्शित अद्वैत चंदन द्वारा निर्देशित ‘सेक्रेट सुपरस्टार’ कामयाबी के साथ दो हफ्ते पूरा कर चुकी है और उसकी आमदनी का आंकड़ा 500 करोड़ को पार गया है. इससे पहले ‘थ्री इडियट्स’ ने 2013 में करीब 20 करोड़ की कमाई की थी. वर्ष 2015 में ‘पीके’ ने सौ करोड़ से अधिक कमायी की थी. विजय आचार्य की ‘धूम 3’ ने भी खासी आमदनी की थी.

aamir_khanयूं तो आमिर खान के साथ सलमान खान, शाहरुख खान और अक्षय कुमार की भी फिल्में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कामयाब होती रही हैं, पर चीन में आमिर खान की मौजूदा लोकप्रियता निश्चित रूप से काबिले-गौर है. इसकी तुलना पूर्व सोवियत संघ में राज कपूर, अफगानिस्तान में शाहरुख खान और पाकिस्तान में सलमान खान की लोकप्रियता से की जा सकती है, परंतु चीन में आमिर खान की फिल्म-दर-फिल्म कमाई के लिहाज से बाकी सितारे काफी पीछे दिखायी देते हैं. जहां तक भारतीय दर्शकों की बात है, तो आमिर खान कई वर्षों से सबसे सफल और प्रतिभाशाली अभिनेता के रूप में प्रतिष्ठित हैं. लेकिन, चीन में हासिल उनकी कामयाबी की कहानी बेहद दिलचस्प है और इसकी शुरूआत 2013 में ‘थ्री इडियट्स’ से होती है जिसमें उन्होंने 18 साल के एक छात्र की भूमिका निभायी थी. तब उनकी उम्र 44 साल की हो चुकी थी.

उस समय चीन में भारतीय फिल्में नहीं के बराबर प्रदर्शित होती थीं. चीनी सिनेमाई बाजार का आकार भी बहुत बड़ा नहीं था. फोर्ब्स पत्रिका के एक लेख में रॉब केन ने लिखा है कि उस समय वैश्विक स्तर पर चीनी फिल्म बाजार 15वें स्थान पर था और बॉक्स ऑफिस पर उसकी कमाई दक्षिण कोरिया, कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे छोटे देशों से भी कम थी. केन ने यह भी रेखांकित किया है कि तब चीन के घरेलू वीडियो बाजार में भी पाइरेटेड डीवीडी की भरमार के कारण कमाई की कोई उम्मीद नहीं थी. लेकिन जिस पाइरेटेड वीडियो के प्रसार ने फिल्मों के हॉल या वीडियो पर रिलीज की संभावनाओं को खत्म किया हुआ था, उसी ने आमिर खान के लिए आगे की राह हमवार कर दी. आज उन्हें चीन में सिर्फ एक फिल्म अभिनेता के तौर पर ही नहीं, बल्कि आमिर हान, देवता और अंकल आमिर जैसी संज्ञाओं से भी जाना जाता है.

पाइरेटेड डीवीडी पर राजकुमार हिरानी की ‘थ्री इडियट्स’ इस कदर मकबूल हुई कि वह एक कल्ट फिल्म बन गयी. चीन के लोकप्रिय सिनेमा वेबसाइट डौबान के अनुसार आज भी यह फिल्म सर्वकालिक लोकप्रिय फिल्मों की सूची में 12वें पायदान पर है और इससे ऊपर मात्र एक चीनी फिल्म ‘फेयरवेल माइ कंकुबाइन’ है. वर्ष 2009 के बाद से चीनी दर्शकों के बीच आमिर खान का जलवा असर करने लगा था. महज अगले चार सालों में चीन का सिनेमा बाजार इतनी तेजी से बढ़ा कि 2013 आते-आते वह अमेरिकी बाजार के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया. लेकिन यह तो बाजार और कमाई के लिहाज से अहम है, चीनियों के बीच सर चढ़ कर बोलती आमिर खान की लोकप्रियता का एक विशेष आयाम और है तथा यह उनकी फिल्मों के कथानक से जुड़ा है. टिप्पणीकारों की मानें, तो उनकी फिल्मों की कहानी और उनके किरदार अपने जीवन के उतार-चढ़ाव को इस तरह अभिव्यक्त करते हैं जो भारतीय जन-जीवन के संघर्षों और सामर्थ्य से संबद्ध होने के साथ-साथ आम चीनी जनता की आकांक्षाओं और चुनौतियों से भी जुड़ जाते हैं. ऐसा असर कोई अन्य स्थानीय या अंतरराष्ट्रीय फिल्म नहीं छोड़ पाती है. यही कारण है कि हिंदी फिल्मों के परदे का यह नायक चीन में अंकल और देवता हो जाता है.

यह अस्वाभाविक भी नहीं है. चीन और भारत दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं. वैश्विक आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा इन दो देशों में बसता है. आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन की धुंध से निकल कर बेहतर माहौल पाने की छटपटाहट और जद्दोजहद भी इन देशों में एक जैसा ही है. ऐसे में आमिर खान की फिल्में जब छात्रों, खिलाड़ियों, जीवन के रोजमर्रा में फंसे सवालों से जुझते लोगों की सकारात्मक कहानियां लेकर चीनियों के यहां जाते हैं, तो उनका भरपूर स्वागत होता है. आश्चर्य की बात नहीं है कि इस अपार लोकप्रियता का एक कारण आमिर खान का टीवी कार्यक्रम ‘सत्यमेव जयते’ भी है जिसमें वे विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते थे. फिल्मों से बाहर समसामयिक मसलों पर उनके बयानों को भी चीनी जनता सम्मान की निगाह से देखती है. चीनी प्रशंसकों की भीड़ से घिरे आमिर खान की तस्वीरें इसकी गवाही देती हैं. उनके प्रभाव का अंदाजा चीनी मीडिया की प्रतिक्रियाओं और टिप्पणियों से भी लगाया जा सकता है. पीपुल्स डेली, ग्लोबल टाइम्स, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट जैसे अखबारों में आमिर खान की फिल्मों की खूब बड़ाई होती है तथा सोशल मीडिया और वेबसाइटों पर सकारात्मक बातें लिखी जाती हैं. मॉर्निंग पोस्ट के एक लेख में तो कहा गया है कि अनेक चीनी मानते हैं कि आमिर खान गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर के बाद सबसे अहम भारतीय सांस्कृतिक निर्यात हैं.    

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