फिल्मी संगीत के महारथी इलैयाराजा

देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पदम् विभूषण के लिए इस साल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान और विचारक पी परमेश्वरन के साथ फिल्मों में संगीत देनेवाले इलैयाराजा का भी चयन किया गया है. उन्हें आठ वर्ष पहले पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है. अपने चार दशक से अधिक के करियर में इलैयाराजा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनगिनत पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया है. उन्हें पांच बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले हैं- तीन संगीत निर्देशन के लिए और दो पार्श्व संगीत के लिए. वर्ष 2012 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2015 में भारत के 46वें अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव में लाइफटाइम एचीवमेंट पुरस्कार दिया गया था. 

Ilayaraaja

चित्र विकिपीडिया से साभार

दक्षिण तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में जन्मे इलैयाराजा की संगीत यात्रा बहुत ही कम उम्र में शुरू हो गई थी जब उन्होंने अपने बड़े भाई पावालार वरदराजन की मंडली में प्रवेश लिया था जो घूम-घूम कर गीत-संगीत के कार्यक्रम करती थी. वर्ष 1943 जन्मे इलैयाराजा की उम्र तब 14 साल थी और उन्होंने एक दशक तक इस मंडली के साथ काम किया. वर्ष 1968 में वे चेन्नई में प्रोफेसर धनराज के शिष्य बने और संगीत की शिक्षा प्रारंभ की. ग्रामीण पृष्ठभूमि और भाई द्वारा संचालित मंडली के अनुभव के कारण उन्हें तमिल लोक गीत और संगीत का ज्ञान था और अब वे पश्चिमी संगीत से भी परिचित होने लगे थे. शास्त्रीय गिटार की शिक्षा के लिए वे कुछ समय लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक में भी रहे. वहां उन्हें गोल्ड मैडल मिला था. उनके फिल्मी और गैर फिल्मी संगीत में लोक संगीत के साथ शास्त्रीय और पश्चिमी संगीत के सुरों का लंबा सिलसिला है. वर्ष 1976 में तमिल फिल्म अन्नाकिली से फिल्मी करियर शुरू करनेवाले इलैयाराजा ने विभिन्न भाषाओं में एक हजार से अधिक फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया है. उनके द्वारा तैयार गीतों की संख्या करीब सात हजार है. यह भी एक दिलचस्प तथ्य है कि जब ज्यादातर संगीत इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड और कम्प्यूटर से जुड़े यंत्रों से तैयार हो रहा है, सुरों के राजा इलैयाराजा संगीत मंडली के साथ गाने रिकॉर्ड करते हैं.

स्वभाव से बेहद विनम्र इलैयाराजा भले कहते रहते हैं कि संगीत बनाया नहीं जा सकता है, यह घटित होता है, परन्तु उनकी छत्रछाया में पले-बढ़े संगीतकारों, साजिंदों और गायकों की तादाद बताती है कि इलैयाराजा की कलात्मक क्षमता प्रतिबद्धता और समर्पण का परिणाम है. शास्त्रीय संगीत के मर्म से इलैयाराजा को परिचित करानेवाले वरिष्ठ संगीतज्ञ टीवी गोपालाकृष्णन कहते हैं कि दुनियाभर में नामचीन होने के बावजूद उन्होंने अपनी सरलता को बचा कर रखा है.  

इलैयाराजा लोक और शास्त्रीय संगीत के इस्तेमाल के साथ सिंफनी ऑर्केस्ट्रा की धुनों को पारंपरिक भारतीय वाद्य यंत्रों के साथ भी प्रयोग में लाते रहे हैं. वर्ष 1993 में उन्होंने लंदन के रॉयल फिलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा के लिए पूरी सिंफनी रची थी. इनसे पहले किसी ऑर्केस्ट्रा के लिए सिंफनी सिर्फ पंडित रविशंकर ने तैयार किया था.  इस ऑर्केस्ट्रा के लिए संगीत रचनेवाले वे पहले एशियाई हैं. 

इलैयाराजा के योगदान का महत्व इस बात से लगाया जा सकता है कि ‘टेस्ट ऑफ सिनेमा’ वेबसाइट ने उन्हें दुनिया के सिनेमा इतिहास के 25 महानतम संगीतकारों में रखा है. इस सूची में वे नौवें स्थान पर हैं. वे उन कुछ संगीतकारों में शामिल हैं जिन्होंने सबसे पहले सिनेमाई संगीत में पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का इस्तेमाल किया है. संगीत की जोरदार समझ और विभिन्न प्रकार के संगीत का सीधा अनुभव के चलते वे अपनी रचनाओं में बहुत कुछ प्रयोग कर सके और अनूठे संगीत की सौगात दी. यह विविधता को सुर में पिरोने का उनका ढंग ही है जो गांव से लेकर नगरों तक के दर्शकों को समान रूप से पसंद आता रहा है. उनके संगीत के कारण फिल्मों का पूरा स्वरूप बेहतर हुआ और गीतों का प्रभाव बढ़ा. दक्षिण के सिनेमा का शायद ही कोई नामचीन निर्देशक और गायक-गायिका ऐसे होंगे जिनके साथ इलैयाराजा ने काम न किया हो. उन्हें स्थापित करने में भी इलैयाराजा का बड़ा योगदान रहा है. हिंदी के दर्शक सदमा, अंजलि जैसी डब फिल्मों और महादेव, हे राम, लज्जा, शिवा, चीनी कम, पा जैसी फिल्मों के जरिये इलैयाराजा से परिचित हैं. 

उन्होंने सिनेमा के अलावा भी बहुत संगीत रचा है. भारतीय और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के मिश्रण से उन्होंने अनेक अल्बम निकाला है तथा कर्नाटिक शास्त्रीय संगीत पर आधारित भक्ति संगीत की रचना भी की है. विश्व संगीत पर आधारित उनका अल्बम द म्यूजिक मेसाया बहुत सराहा गया था. आम तौर पर शालीन और मृदुभाषी इलैयाराजा अपने काम के प्रति इतने समर्पित हैं कि उन्होंने कॉपीराइट के सवाल पर मशहूर गायक एसपी बालासुब्रमण्यम को अदालती नोटिस देने से भी गुरेज नहीं किया. एसपी ने अपने अधिकतर गीत इलैयाराजा के निर्देशन में ही गाया है. पिछले साल जब उन्होंने कई देशों में अपने कार्यक्रम किये और इलैयाराजा के गीत गाये, तब यह नोटिस दिया गया था. इस प्रकरण ने सिनेमा में कॉपीराइट के मुद्दे को फिर से चर्चा में लाने में मदद की. 

इलैयाराजा को पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाना सिनेमा संगीत के लिए भी शानदार अवसर है. इस अवसर पर हमारे फिल्मकारों और संगीतकारों को आत्मचिंतन भी करना चाहिए कि शोर-शराबे और नकल के बिना भी कालजयी संगीत बन सकता है तथा लोगों द्वारा पसंद किया जा सकता है. इलैयाराजा का लंबा सफर एक बड़ा आदर्श है. 

 

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