अक्षय कुमार का स्टारडम

पिछले साल के शुरू में लोकप्रिय युवा अभिनेताओं में से एक वरुण धवन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि नई पीढ़ी के लिए तीनों खानों या फिर अक्षय कुमार या अजय देवगन के जैसा स्टारडम हासिल करना बहुत मुश्किल है. बीते ढाई दशक से ये स्टार बॉलीवुड के आकाश में छाये हुए हैं तथा इन्होंने अनेक असफल फिल्मों के झटकों के बावजूद कई ब्लॉकबस्टर और हिट फिल्में दी हैं. इतना वक्त बीत जाने के बाद और इस दौरान ढेरों अभिनेताओं के आने-जाने के बावजूद इन सितारों का किसी फिल्म में होना कामयाबी की गारंटी है. सलमान खान की ‘टाइगर जिंदा है’ तीन हफ्तों में तीन सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है और अब भी भारी भीड़ खींच रही है. सिनेमा के पंडितों की नजर अब अक्षय कुमार की ‘पैड मैन’ पर है.

वर्ष 2017 में आयी अक्षय कुमार अभिनीत और श्री नारायण सिंह द्वारा निर्देशित ‘ट्वायलेट- एक प्रेम कथा’ इस स्टार की पांचवी लगातार हिट फिल्म थी. उसमें स्वच्छता और शौचालय के महत्व को रेखांकित किया गया था. निर्देशक आर बल्कि ‘पैड मैन’ मासिक धर्म और सैनिटरी नैपकिन जैसे जरूरी विषय पर आधारित है.

यह बहुत सुखद है कि मनोरंजन के साथ बॉलीवुड का पॉपुलर खेमे और बड़े बजट की फिल्मों द्वारा कुछ सालों से देश और समाज के मौजूदा सवालों पर रौशनी डाली जा रही है. यह भी अच्छा है कि ऐसी फिल्मों से बड़े स्टार जुड़ रहे हैं. हालांकि किसी फिल्म के हिट होने का कोई निर्धारित फॉर्मुला नहीं होता है, पर यदि हम अक्षय कुमार के करियर पर नजर डालें, तो ‘पैड मैन’ की सफलता में कोई संदेह नहीं रह जाता है. ‘ट्वायलेटः एक प्रेम कथा’ का बजट 75 करोड़ था और बॉक्स ऑफिस पर उसकी कमाई का हिसाब 130 करोड़ से ज्यादा था. फिल्म के कुल बिजनेस की राशि और भी अधिक हो सकती है.

akshay-kumar‘पैड मैन’ आसानी से सस्ते सैनेटरी नैपकिन महिलाओं को सुलभ करने का संदेश देती है. बाजार में इसकी उपलब्धता के बावजूद सिर्फ 12 फीसदी महिलाएं ही उन्हें खरीदने की क्षमता रखती हैं. एक चिंताजनक तथ्य यह भी है कि करीब 80 फीसदी महिलाएं नैपकिन का इस्तेमाल ही नहीं करती हैं. कमजोर खरीद क्षमता के साथ महिलाओं, खासकर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में, तक उन्हें पहुंचाना पाना भी एक बड़ा सवाल है. वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी लगाने के फैसले की भी व्यापक आलोचना हुई है तथा इसे वापस कराने के लिए अभियान चलाये जा रहे हैं.

खैर, ‘पैड मैन’ से उम्मीद है कि नैपकिन को लेकर समझदारी और संवेदनशीलता बढ़ाने में यह फिल्म मदद करेगी. हमारे सिनेमा का इतिहास बताता है कि जब भी पॉपुलर फिल्मों ने ईमानदारी और मेहनत से किसी मुद्दे को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है, दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली है. इसी विषय पर पिछले साल ‘फुल्लू’ बनी थी, लेकिन कलात्मक स्तर पर कमजोरी के कारण उसे सफलता नहीं मिल सकी. ‘पैड मैन’ को बल्कि जैसा निर्देशक और अक्षय कुमार जैसा स्टार मिला है, तो दर्शक जरूर ही स्वागत करेंगे. इसमें सोनम कपूर, सुनील सिन्हा, राधिका आप्टे जैसे मंजे हुए कलाकार भी हैं, अमित त्रिवेदी जैसे संगीतकार का साज है तथा पीसी श्रीराम जैसे अनुभवी का छायांकन है.

यदि समकालीन सुपरस्टारों- आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान- से अक्षय कुमार के करियर की तुलना की जाये, तो खानों के खाते में बड़ी हिट और ब्लॉकबस्टर फिल्में अधिक हैं. लेकिन सफल फिल्मों की संख्या तथा लागत और कमाई के अनुपात का संज्ञान लिया जाये, तो अक्षय कुमार का दायरा बड़ा नजर आता है. फिल्म इंडस्ट्री में कहा भी जाता है कि भरोसेमंद अभिनेता होने तथा कम लागत में अधिक कमानेवाली ज्यादा फिल्मों में काम कर अक्षय कुमार बड़ी तादाद में कलाकारों और तकनीशियनों की आमदनी का एक जरिया बन जाते हैं.

इतने सालों से लगातार चोटी पर बने रहने के बावजूद अक्षय कुमार का नाम कभी किसी विवाद में सामने नहीं आया, जैसा कि अन्य सुपरस्टारों के साथ होता रहता है. उन्हें जानने-समझनेवाले तथा उनके साथ काम कर चुके लोग अक्सर कहते रहते हैं कि अक्षय कुमार को अपने स्टारडम का कोई अभिमान नहीं है. इस राय से असहमत होने का कोई कारण नहीं है.

एक लेख में ट्रेड के जानकार नवनीत मुंदरा ने हिसाब लगाया है कि अपने करियर में अक्षय ने करीब 110 फिल्मों में काम किया है जिनमें से कम-से-कम 27 सीधे-सीधे हिट रहीं और दो ने ब्लॉकबस्टर का दर्जा हासिल किया. तीन दशक के करियर में आमिर खान ने सिर्फ 40 फिल्में की हैं जिनमें से 18 को हिट और नौ को ब्लॉकबस्टर कहा जा सकता है. सत्तर से अधिक फिल्मों में काम कर चुके सलमान खान के हिसाब में 15 हिट और 13 ब्लॉकबस्टर हैं, तो शाहरुख खान की 60 के आसपास की फिल्मों में 17 हिट और 10 ब्लॉकबस्टर हैं. अक्षय कुमार की एक खासियत यह भी रही है कि उन्होंने कभी भी खानों से प्रतियोगिता नहीं की है और अलग-अलग भूमिकाएं कर अपने लिए स्टारडम का एक नया कोना हासिल किया है.

इस यात्रा में बड़े उतार-चढ़ाव भी रहे हैं. वर्ष 1994 में उन्होंने पांच हिट फिल्में दी थीं, पर अगले पांच सालों में उनकी 20 फिल्में धाराशायी हो गयीं. पर नयी सदी की शुरुआत के साथ ही उनकी गाड़ी पटरी पर आने लगी और अगले छह-सात सालों में उन्होंने अपना मुकाम ऐसा बना लिया कि निर्माता और दर्शक दोनों ही उन पर भरोसा कर सकते थे. कभी फिल्मी पंडितों द्वारा खारिज कर दिये गये अक्षय कुमार आज तीन खानों के अलावा हिंदी सिनेमा के एकमात्र सुपरस्टार कहे जाते हैं.

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