भाई ने फिर शर्ट उतारी है! भाई गॉड!!

सलमान खान की बहुप्रतीक्षित ‘टाइगर जिंदा है’ बड़े परदे पर आ चुकी है. इसी के साथ यह कयास भी लगाया जाने लगा है कि यह फिल्म किस कदर हिट होगी और कितना कमायेगी. दरअसल, दो सौ-तीन सौ करोड़ कमाने के इस दौर में इस फिल्म की कमाई पर बतकही महीनों से चल रही है. अगर हम सलमान खान की पांच पिछली फिल्मों की टिकट खिड़की पर कमाई पर नजर डालें, तो हमारे सामने ये आंकड़े आते हैं- कबीर खान निर्देशित ‘ट्यूब लाइट’ (119.26 करोड़), अली अब्बास जफर की ‘सुल्तान’ (300.45 करोड़), सूरज बड़जात्या की ‘प्रेम रतन धन पायो’ (210.16 करोड़), कबीर खान की ‘बजरंगी भाईजान’ (320.34 करोड़) तथा साजिद नाडियाडवाला की ‘किक’ (231.85 करोड़). इन आंकड़ों को देखते हुए यह उम्मीद की जा सकती है कि ‘टाइगर जिंदा है’ भी अच्छी कमाई करेगी और छुट्टियों के इस मौसम में कई हफ्तों तक किसी बड़ी फिल्म के नहीं आने का फायदा भी इसे होगा.

सलमान खान के स्टारडम और उनके प्रशंसकों की बड़ी तादाद और उनकी उम्मीदों का दबाव निर्देशक जफर पर भी रहा है तथा उन्होंने इसे माना भी है. एक बड़े स्टार के बतौर लंबे समय से हिंदी सिनेमा में स्थापित सलमान खान पर कोई भी टिप्पणी उनकी फिल्मों के कथानक के ठोस होने या निर्देशक के कमाल करने या फिर कलात्मक दृष्टिकोण के आधार पर कर पाना संभव नहीं है. इस लिहाज से वे अपने समकालीन स्टारों- अक्षय कुमार, शाहरुख खान और आमिर खान- से बिल्कुल अलग हैं. यह भी कहा जा सकता है कि हल्के-फुल्के रोमांस और जोरदार एक्शन से सजी उनकी फिल्मों की अलग ही श्रेणी है. जफर एक साक्षात्कार में कहते हैं कि फिल्म को सलमान खान के छवि के अनुरूप ढालने की चुनौती उनके सामने थी. ऐसे में सलमान खान के स्टारडम को टटोलना दिलचस्प हो सकता है.

salman-khan

चित्र ‘टाइगर जिंदा है’ के फेसबुक पेज से

साल 2000 से 2009 के बीच उनकी 29 फिल्में आयीं जिनमें से सिर्फ 11 को कामयाबी नसीब हुई थी. वह वही दौर था जब वे कई तरह के विवादों से घिरे थे और शाहरुख खान से मतभेदों की खूब चर्चा थी. साल 2008 में उनकी फिल्मों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद तो कहा जाने लगा था कि सलमान खान का दौर अब अपने अंतिम चरण में है. लेकिन भाई ने सभी आशंकाओं को दरकिनार करते हुए अपनी धमाकेदार वापसी की. ‘दबंग’ (2010) के बाद आयी उनकी 10 में से आठ फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुई हैं. ‘दबंग’ की कामयाबी की दास्तान आज किसी दंतकथा से कम नहीं है. फिल्म के लिए जब सलमान खान के पिता और मशहूर फिल्म लेखक सलीम खान तथा उनके भाई अरबाज खान ने वितरकों से भारी रकम मांगी तो वितरकों ने नहीं माना. यह स्वाभाविक ही था क्योंकि कोई भी कमाई को लेकर आश्वस्त नहीं था. नतीजा यह हुआ कि सलमान खान के परिवार ने ही बड़े क्षेत्रों के वितरण अधिकार अपने पास रख लिये. फिल्म को जोरदार ओपनिंग मिली और उसने आमिर खान-अभिनीत ‘थ्री इडियट’ के ओपनिंग रिकॉर्ड को 40 फीसदी के अंतर से तोड़ दिया.

आज जब उनकी सफलता को देखते हैं, तो यह सहजता से कहा जा सकता है कि दो-तीन साल में वे राजेश खन्ना के लगातार 15 ब्लॉकबस्टर फिल्मों के रिकॉर्ड को भी तोड़ देंगे. वैसे पूरे करियर के हिसाब से देखें, तो सलमान खान से अधिक सफल फिल्में हिंदी सिनेमा के इतिहास में किसी अन्य अभिनेता ने नहीं दी है. ‘टाइगर जिंदा है’ को लेकर को चर्चा है और सिनेमाघरों में जो भीड़ उमड़ रही है, वह सिर्फ प्रचार का असर नहीं है, सलमान खान के जादू के बरकरार रहने, बल्कि बढ़ते जाने का प्रमाण है.

यह बात अक्सर कही जाती है कि सलमान खान के स्टारडम को किसी तार्किकता के आधार पर नहीं समझा जा सकता है. यह बात बिल्कुल ठीक है, पर साथ में यह भी कहा जाना चाहिए कि उनके समकालीन स्टारों की बरसों से चोटी पर जमे रहने को भी ज्ञान-बुद्धि से समझा-समझाया नहीं जा सकता है. अशोक कुमार से अमिताभ बच्चन और फिर मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा तक के सिलसिले को सामाजिक, सांस्कृतिक और सिनेमाई आयामों से पढ़ा जा सकता है तथा उसके विविध पहलुओं को रेखांकित किया जा सकता है. पर हमारे वर्तमान के फिल्मी सितारों के करिश्मे पूरी तरह से अबूझ हैं. कहने के लिए हम भले कह लें कि सलमान में खास आकर्षण है, परदे पर उनकी टाइमिंग परफेक्ट है या फिर उनसे जुड़े विवादों ने उनके स्टारडम को आधार दिया है. लेकिन ये सारी बातें कमोबेश अनेक कलाकारों में हो सकती हैं जिन्होंने गाहे-बगाहे कुछ सफल फिल्में दी भी हैं.

चौबीस घंटे चलनेवाले बेशुमार चैनलों, सोशल मीडिया के विराट फैलाव और वेबसाइटों की बाढ़ के बीच फिल्में भी खूब बन रही हैं तथा मनोरंजन के कई रास्ते खुले हैं. ऐसे में सलमान खान लगातार आगे चल रहे हैं और अपने समकालीनों से बड़ी लोकप्रियता कमा रहे हैं, तो यह मानना पड़ेगा कि उनके प्रशंसकों को उनकी अदाएं भाती हैं, और वे इस कदर भाती हैं कि फिल्म-दर-फिल्म उनके दुहराव से वे बोर भी नहीं हो रहे हैं. सलमान खान आमिर की तरह हर फिल्म में अलग ‘लूक’ में नहीं दिखते और न ही शाहरुख की तरह किरदार या कथानक बदलते हैं. वे परदे पर, टेलीविजन पर, मंच पर- हर जगह एक-सा दिखते और करते हैं. वे हमेशा सलमान खान होते हैं. परदे पर शायद ही किसी को उनके किरदार का नाम याद रहता होगा. इस लिहाज से सलमान खान का स्टारडम हमारे सिनेमा की एक विलक्षण परिघटना है जिसे विश्लेषित करने में अभी समय लगेगा.  

 
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